
हरिद्वार। माता-पिता की सेवा के दावों के बीच बुजुर्गों के साथ उत्पीड़न का एक बेहद संवेदनशील मामला सामने आया है। भूपतवाला की रानी गली (चौपड़ा भवन) के रहने वाले 70 वर्षीय बुजुर्ग राजबीर पुरी आज अपनी ही संपत्ति के लिए दर-दर भटकने को मजबूर हैं। हरिद्वार प्रेस क्लब में पत्रकारों से वार्ता करते हुए पीड़ित बुजुर्ग ने रोते हुए अपनी आपबीती सुनाई और बताया कि कैसे उनके अपने ही खून ने उन्हें बेसहारा छोड़ दिया।
राजबीर पुरी (पुत्र भगवानपुरी) के अनुसार, वह अपने मकान में ही एक दुकान का संचालन कर अपना जीवनयापन कर रहे थे। कुछ समय पहले जब वह बीमार हुए, तो उनके बेटे और बहू ने एक साजिश के तहत उनके साथ न सिर्फ दुर्व्यवहार और मारपीट की, बल्कि उन्हें उनके ही घर व दुकान से जबरन बाहर निकाल दिया।
बुजुर्ग ने अपने अधिकारों के लिए एसडीएम कोर्ट में वाद दायर किया था। अदालत ने बुजुर्ग के पक्ष को सही मानते हुए 23 सितंबर 2025 को उनके हक में फैसला सुनाया था। अदालत के आदेश के मुताबिक पुलिस-प्रशासन को उन्हें मकान और दुकान पर वापस कब्जा दिलाना था। लेकिन विडंबना देखिए कि कोर्ट के आदेश के महीनों बाद भी स्थानीय पुलिस और प्रशासन कागजी कार्रवाई से आगे नहीं बढ़ सका है।
पीड़ित राजबीर पुरी का कहना है:
“जब मेरा सगा बेटा और बहू मुझे इस उम्र में मार पीटकर निकाल देते हैं और कोर्ट के आदेश के बाद भी पुलिस मुझे मेरा हक नहीं दिला पाती, तो मैं न्याय के लिए कहां जाऊं? मैं इस बीमार हालत में कब तक सड़कों पर भटकता रहूंगा?”
बुजुर्ग ने जिला प्रशासन और पुलिस के उच्चाधिकारियों से अपील की है कि वे अदालत के आदेश का सम्मान करते हुए उन्हें उनके घर में सुरक्षित प्रवेश दिलाएं और दोषी बेटे-बहू के खिलाफ सख्त कदम उठाएं।
